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दिवाली पर माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती हैं और उनकी आरती उतारी जाती हैं। हर कोई इस दिन अपने घर में माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती और भगवान गणेश की पूजा अर्चना करता हैं और अपने परिवार के वैभव, संपदा और सुख की कामना करता हैं। इस दिन लक्ष्मी पूजा की तैयारियां सुबह से ही शुरू हो जाती हैं और हर कोई उसके लिए सामग्री खरीदने में लग जाता (Laxmi pujan vidhi) हैं। ऐसे में आपके घर में भी लक्ष्मी पूजा होने का विधान होगा किंतु इसके लिए शुभ मुहूर्त जानना अति आवश्यक होता हैं।
वह इसलिए क्योंकि यदि आप अपने घर में लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त में नही करेंगे तो या तो आपको उसका फल ही नही मिलेगा या फिर बहुत ही कम मात्रा (Laxmi puja mantra in Hindi) में मिलेगा। ऐसे में यदि लक्ष्मी पूजा को उसके शुभ मुहूर्त में और वो भी पूरे विधि विधान के साथ किया जाए तो उसका फल मिलते देर नही लगती हैं। तो आज हम आपको इस लेख के माध्यम से (Laxmi mata ki aarti) लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त 2025 के लिए और साथ ही उसकी पूरी विधि, मंत्र और आरती सहित बताएँगे।
लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त 2025 (Laxmi pujan ka muhurat 2025)
इस बार अर्थात वर्ष 2025 में दिवाली का त्यौहार एक दिन का ना होकर दो दिन का पड़ रहा हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह शंका पैदा हो गयी हैं कि ऐसे में वो किस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा करें और उसका शुभ मुहूर्त क्या हैं। दरअसल इस बार की दीपावली 24 अक्टूबर से शुरू होकर 25 अक्टूबर तक रहने वाली हैं और साथ ही 24 अक्टूबर की अर्ध रात्रि से ग्रहण भी लग रहा हैं। अब ग्रहण में तो किसी भी देवी देवता की पूजा निषेध मानी जाती हैं। ऐसे में आपको लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त जानना ही होगा।
तो आज हम आपको बता दे कि वैसे तो दिवाली दो दिनों की हैं लेकिन इसका मुख्य दिन 24 अक्टूबर ही रहेगा। हालाँकि यह 24 अक्टूबर की शाम से शुरू होगी। ऐसे में आप उसी दिन शाम में लक्ष्मी पूजा करके उसके बाद रात मे दिवाली का त्यौहार मना सकते हैं। इसमें आपको किसी भी तरह की चिंता करने की कोई भी आवश्यकता नही हैं। आइए इसका निश्चित समय भी जान लेते हैं ताकि आपकी सभी तरह की शंकाएं दूर हो जाए।
लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त | शाम 6 बजकर 54 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 16 मिनट तक |
लक्ष्मी पूजा की कुल अवधि | 1 घंटा 21 मिनट की |
प्रदोष काल का समय | शाम 5 बजकर 42 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 16 मिनट तक |
वृषभ काल का समय | शाम 6 बजकर 54 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 50 मिनट तक |
तो इस तरह से आप दिए गए समय अंतराल में माँ लक्ष्मी की पूजा पूरे विधि विधान के साथ कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद ग्रहण कर सकते हैं। अब आपको यह भी जानना होगा कि लक्ष्मी पूजा करने की सही विधि कौन सी होगी ताकि इसमें कोई कमी ना रहने पाए। तो अब हम आपके साथ वही साँझा करेंगे।

लक्ष्मी पूजा की विधि (Laxmi pujan vidhi)
लक्ष्मी पूजा की सही विधि का जानना भी आपके लिए अत्यंत आवश्यक हैं क्योंकि बहुत लोग लक्ष्मी पूजा तो कर लेते हैं लेकिन उसकी सही विधि नही पता होने के कारण उस पूजा का उचित फल उन्हें नही मिल पाता हैं। ऐसे में यदि आप पहले से ही लक्ष्मी पूजा की विधि को जान लेंगे तो अवश्य ही उसका फल आपको मिलेगा। आइए जाने लक्ष्मी पूजा की संपूर्ण पूजा विधि के बारे में विस्तार से।
- सबसे पहले तो आपको अपने पूजा स्थल की अच्छे से साफ सफाई करनी चाहिए और हर एक गंदगी को निकाल बाहर कर देना चाहिए। वह इसलिए क्योंकि लक्ष्मी माता को गंदगी बिल्कुल भी नही पसंद। ऐसे में जिस घर में गंदगी होती हैं वहां लक्ष्मी माता का कभी भी निवास नही हो सकता हैं।
- उसके बाद आप एक चौकी को रखें और उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाए। यह लाल कपड़ा और चौकी भी एकदम साफ होने चाहिए और इनमे किसी भी प्रकार की गंदगी नही लगी होनी चाहिए।
- अब जब आप लाल कपड़ा बिछा लेंगे तो उस पर माँ सरस्वती, माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश का चित्र या मूर्तियाँ रखें। यदि आपके पास भगवान कुबेर की मूर्ति या चित्र हैं तो वह भी उनके साथ रखें।
- इसके बाद आप एक बड़ी थाली में सभी दीयों को सजाये और बीच में सबसे बड़ा दिया रखें। इन सभी दीयों में तेल या घी भर दे और बाती रखें। जब सभी दिए सजकर तैयार हो जाए तो माँ लक्ष्मी के सामने भी एक ज्योति वाला दीपक जलाए।
- उसके बाद आपने जो जो दिए सजाये हैं, उन्हें भी जला दे। सब दिए जलाने के बाद आप माँ लक्ष्मी को प्रणाम करें और उनका विधिवत मंत्र बोले।
- इसके बाद आप गंगाजल या गौमूत्र को पूजा स्थल में हर और छिडके। जब यह छिड़क ले तो उसके बाद माँ लक्ष्मी और अन्य भगवान को तिलक लगाए। यह तिलक कुमकुम का होगा तो ज्यादा बेहतर रहेगा।
- तिलक लगाने के बाद उस पर चावल चढ़ाये और आपने आज जो भी मीठा व्यंजन बनाया हैं, उसका भोग माँ लक्ष्मी व अन्य भगवान को लगाए।
- जब आप व्यंजन का भोग लगा लेंगे तो अन्य भोजन भी मातारानी के सामने रखें। उस खाने में प्याज या अन्य अनावश्यक चीज़े नही होनी चाहिए।
- अब आप कमल का पुष्प, कमलगट्टा, अक्षत, चावल, मोली, धन, नयी धातु इत्यादि चीज़ों को माँ लक्ष्मी को चढ़ा दे और उन्हें प्रणाम कर फिर से उनके मंत्र का जाप करें।
- जब यह सब हो जाए तो आप सभी घरवाले दीयों को भी प्रणाम कर उन पर चावल, खील, बताशे इत्यादि चढ़कर उन्हें प्रणाम करें।
- इसके बाद माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती और भगवान गणेश की आरती विधिपूर्वक करें। इस बात का ध्यान रखें कि सबसे पहले आपको भगवान गणेश की आरती करनी होगी। उसके बाद आप माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती की आरती कर सकते हैं।
- जब आरती समाप्त हो जाए तो माँ लक्ष्मी व अन्य देवी देवताओं को प्रणाम कर अपनों से बड़ों का आशीर्वाद ले और दीयों को अपने घर के अंदर व बाहर सजाये।
- तो बस इस तरह से दिवाली पर आपके द्वारा की जाने वाली माँ लक्ष्मी की पूजा विधिपूर्वक पूरी हो जाएगी।
माँ लक्ष्मी का मंत्र (Laxmi puja mantra in Hindi)
ऊपर माँ लक्ष्मी की पूजा में आपने पढ़ा कि उनको प्रणाम करते समय आपको माँ लक्ष्मी से जुड़े हुए मंत्र का जाप करना होगा। तो अब आप इस असमंजस में होंगे कि यह मंत्र कौन सा होगा और आपको किस मंत्र का जाप करके सबसे अच्छा फल मिलेगा। तो अब हम आपको माँ लक्ष्मी से जुड़ा हुआ यह मंत्र भी बता देते हैं, जिसका आपको विधिपूर्वक जाप करना चाहिए।
- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद।
- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:।।
तो बस इसी मंत्र का जाप करने से लक्ष्मी माता आपसे प्रसन्न हुए बिना नही रह पाएंगी। ऐसे में आप इस मंत्र का पूरे विधि विधान और शुद्ध मन के साथ ही जाप करें ताकि लक्ष्मी माता आपको इच्छित वर दे सके।
लक्ष्मी माता की आरती (Laxmi mata ki aarti)
अब लेख के सबसे अंत में आपको यह भी जानकारी दे देते हैं कि लक्ष्मी पूजा के अंत में आपको जो माँ लक्ष्मी की आरती करनी थी वह कौन सी होती हैं। ऐसे में यदि आप लक्ष्मी पूजा करने जा रहे हैं तो आपको लक्ष्मी माता की यह आरती करनी होगी।
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
मैया सुख संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।
मैया तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
मैया सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
मैया वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
मैया क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई नर गाता।
मैया जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।।
माँ लक्ष्मी की पूजा विधि – Related FAQs
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प्रश्न: लक्ष्मी पूजा करते समय कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए?
प्रश्न: लक्ष्मी जी की आरती का मुहूर्त कब है?
प्रश्न: लक्ष्मी पूजन की विधि कैसे की जाती है?
प्रश्न: दीपावली पर लक्ष्मी पूजन कैसे करें?
तो इस तरह से आज आपने जान लिया कि यदि दिवाली का त्यौहार आ रहा हैं तो उसमे सबसे मुख्य चीज़ जो कि लक्ष्मी पूजा होती हैं, उसके लिए आपको पहले से ही क्या क्या तैयारियां करके रखनी चाहिए। साथ ही उनकी पूजा करने की सही विधि, मंत्र व आरती क्या क्या होती हैं। इसलिए आगे से जब भी आप माता लक्ष्मी की पूजा करें तो हमारे द्वारा बताई गयी विधि का ही पालन करें।